Friday, March 2, 2012

शेर शिवराज हैं!!!!!!!!!!!

इन्द्र जिमि जृम्भ पर

बाडव सअंभ पर

रावण सदंभ पर

रघुकुल राज है !

पवन बारिबाह पर

संभु रतिनाह पर

ज्यों सहसबाह पर

राम द्विजराज हैं !

दावा दृमदंड पर

चीता मृगझुन्द पर

भूषण वितुण्ड पर

जैसे मृगराज हैं !

तेज तमअंस पर

कन्ह जिमि कंस पर

त्यों म्लेंच्छ बंस पर

शेर शिवराज हैं!!!!!!!!!!!

- महाकवि भूषण

भाषांतर -

जृंभासुरास जसा इंद्र,

समुद्रास वडवानल,

गर्विष्ठ रावणास रामचंद्र,

मेघास वायु,

मदनास शिव,

सहस्त्रार्जुनास परशूराम,

वृक्षास दावाग्नी,

हरीण कळपावर चित्ता,

हत्तीस सिंह,

अंध:कारास प्रकाश,

कंसास श्रीकृष्ण,

त्याप्रमाणे म्लेंच्छकुळावर,

सिंहासमान शूर शिवराय होय!

-कविराज भूषण

सिवराज देखिये...सिवराज देखिये...सिवराज देखिये...सिवराज देखिये...

सक्र जिमि सैल पर | अर्क तम-फैल पर | बिघन की रैल पर | लंबोदर देखिये...|

राम दसकंध पर | भीम जरासंध पर | भूषण ज्यो सिंधु पर | कुंभज विसेखिये...|

हर ज्यो अनंग पर | गरुड ज्यो भुजंग पर | कौरव के अंग पर |पारथ ज्यो पेखिये...|

बाज ज्यो विहंग पर | सिंह ज्यो मतंग पर |म्लेंच्छ चतुरंग पर | सिवराज देखिये...|

सिवराज देखिये...सिवराज देखिये...सिवराज देखिये...सिवराज देखिये...

-कविराज भूषण

भाषांतर

ज्याप्रमाणे इंद्र पर्वताचा, सूर्य अंधाराचा, आणि श्रीगणेश सर्व विघ्नांचा नाश करतात,

किंवा, ज्याप्रमाणे श्रीरामाने रावणाचा, भीमाने जरासंधाचा नाश केला,

अगस्ती ॠषींनी सागर एका आचमनात प्यायला,

ज्याप्रमाणे, महादेवाने मदनास जाळले, अर्जुनाने कौरवांस मारले,

किंवा, जसे साप गरुडास पाहून, पक्षी ससाण्यास पाहून आणि हत्ती सिंहास पाहून गर्भगळीत होतात,

त्याचप्रमाणे, म्लेंच्छांची चतुरंग सेना शिवरायांच्या पराक्रमाने भयभीत होते!

-कविराज भूषण